Tuesday, November 15, 2022

मिथिला के तीर्थस्थल

अहिल्या स्थान श्रीमद वाल्मीकि रामायण के बाल-कांड के 48 वे सर्ग में वर्णित कथा - मुनि विश्वामित्र राम एवं लक्छ्मन के साथ मिथिला नरेश जनक की राजधानी जनकपुर जा रहे थे .कुछ दूरी तय करने के बाद उन्होंने एक विराट आश्रम देखा.,जो सुना पड़ा था.जिज्ञासावश रामचंद्र ने विश्वामित्र से पूछा यदपि यह आश्रम इतना भव्य है फिर भी कोई ऋषि-मुनि यहाँ दिख नही रहे.रामचंद्र का प्रश्न सुनकर विश्वामित्र ने बतलाया की यह महर्षि गौतम का आश्रम है एवं इन्द्र - अहिल्या का प्रसंग तथा महर्षि गौतम द्वारा दोनों को श्राप देने की कथा सुनाई.फिर रामचंद्र के चरण -स्पर्श से अहिल्या को उद्धार भी करवाया ,जैसा श्राप का आदेश था. यही स्थान अहिल्या स्थान के नाम से जाना जाता है.1635 ई. दरभंगा के तत्कालीन राजा छत्र सिंह द्वारा एक भव्य मंदिर का निर्माण करवाया गया था.इस मंदिर में सीता-राम एवं लक्छ्मन के साथ हनुमान तथा अहिल्या- गौतम की स्फटिक मूर्तियाँ विद्यमान है.महाराजा छत्र सिंह ऐसा ही एक विशाल मंदिर सौराठ ग्राम में भी बनवाया था एवं शिव लिंग की स्थापना करवाई थी. सौराठ वही गाँव है जहाँ मैथिल ब्राह्मणों के पंजीकृत विवाह पद्धति का प्राचीन इतिहास है. करीब 50 वर्ष पूर्व दछिण भारत से रामानुज अनुयायिओं की एक टोली सीता-राम सम्बंधित स्थलों की जानकारी लेने के क्रम में यहाँ आये थे. उनलोगों ने अहिल्या उद्धारस्थल पर एक स्तम्भ एवं पिंड का निर्माण करवाया था,यह आज भी मौजूद है. यहाँ आशाराम बापू का आश्रम है जहाँ धार्मिक एवं सामाजिक कार्य होता रहता है. मुख्य मंदिर तो भग्न होने के कगार पर था,लेकिन बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद द्वारा अपने अधीन लेने के बाद अब लोगों की आशा बंधी है कि यह मंदिर अपने भव्य अतीत को पुनः प्राप्त कर सकेगा.इस स्थान के पास ही गौतम कुण्ड है जो खिरोई नदी के तट पर है.यही गौतम ऋषि का आश्रम है.याग्लाव्य मुनि का आश्रम जगवन तथा श्रृंगी मुनि का आश्रम .सब 5 किलो मीटर के दायरे में ही है. अहिल्या स्थान दरभंगा जिला में दरभंगा-सीतामढ़ी रेल पथ के कमतौल स्टेशन से दछिण दिशा में 2 किलो मीटर कि दूरी पर अवस्थित है. यहाँ दरभंगा-मधवापुर राज्य उच्च पथ संख्या 75 से कमतौल एवं टेकटार से भी जाया जा सकता है.

Wednesday, April 15, 2020


भूगोल का गोल
हमसब किसी एक या दो विषय को अधिक पसंद करते हैं और उस विषय को ज्यादा पढ़ते और जानने लगते है| फिर कुछ तो हमें जिंदगी में बस सीखनी ही पड़ती हैं, जैसे गणित और भाषा| इनके बिना गुजरा नहीं हो सकता| कुछ-कुछ विज्ञान भी समझना जरुरी हो जाता है| जब कुछ पुरानी बातें पढ़ते,सुनते या कोई ऐसी सिनेमा देखते है,जैसे पिछले कुछ सालों में प्रदर्शित ‘जोधा-अकबर’, ‘पद्मावत’, ‘बाजीराव मस्तानी’ इत्यादि तो इतिहास में रूचि आने लगती हैं| चुनाव होने वाला होता है और नेतागण की बातें सुनकर लगता है,क्या हमारा समाज इतना पिछड़ा हुआ है, ये महाशय सब ठीक कर देंगे क्या? स्वास्थ और शिक्षा पर किसी का ध्यान क्यों नहीं गया आजतक? समाजशास्त्र जान लेते है| एक पार्टी चुनाव जीत सरकार बनाती है| मंत्री-प्रधानमंत्री देश-विदेश का दौरा करने लगते है और मंत्री महोदय चुनाव के पहले किया वादा भूल कर समाज के स्थान पर अपने विकास पर ही ध्यान केन्द्रित करते है,तब राजनीतिशास्त्र समझ में आ ही जाता है|
लेकिन भूगोल जानने के लिए आपको पढ़ना या घूमना पड़ता है | कोई और तरीका नहीं है इसे समझने का | २०१४ में मैं जमशेदपुर से हैदराबाद आई| काफ़ी लोग जमशेदपुर नाम सुनकर ऐसे चौंकते जैसे यह शहर इस ग्रह पर नहीं है| एकबार जब मैं जमशेदजी टाटा, टिस्को, टेल्को, टाटा ट्रक के बारें में पड़ोस में रहने वाली महिला को बताने लगी तो उनका कहना था कि टाटा तो विदेशी कंपनी है| फिर झारखंड में कैसे हो सकता है?
एकबार हमलोग ओडिशा गए भगवान जगन्नाथ का दर्शन करने| जब मेरी ननद को पता चला तो कहने लगी “जब पूरी गए तो रामेश्वरम् भी चले जाते”| कहाँ पूरी और कहाँ रामेश्वरम्? उनके कहने से लग रहा था समुद्र के किनारे-किनारे सब शहर के एक कॉलोनी से दूसरे कॉलोनी जैसा ही होगा|
बहुत कम लोग मिले जो मेरे बिहारी होने का सुनकर बिहार की तारीफ़ करने लगे हो | एकबार किसी वर्कशॉप में एक वरिष्ट शिक्षिका मिली | जब बातों-बातों में उन्हें पता चला कि मैं बिहार से हूँ तो वह बहुत खुश हुई| “क्या बात है! बहुत ख़ुशी हुई” – ऐसा उन्होंने कहा| मेरे साथ जो शिक्षिका थी वो महाराष्ट्र से है, वो कहने लगी मैडम मैं महाराष्ट्र से हूँ और बिहार-महाराष्ट्र आस-पास ही हैं| मैं फिर अचंभित और हतप्रभ!

Wednesday, June 1, 2016

मायका











मायका
संयुक्ता जैसे ही खाने के लिए बैठी , उसने एक –एक करके अपने गहने उतारने शुरू कर दिए | पहले हार,फिर बाजूबंद....कंगन,मांगटीका..सब | 
सबलोग आश्चर्यचकित है...ये ऐसा क्यों कर रही है ?
वेंकटराव विजयनगरम के एक सम्मानित व्यक्ति है | उनकी दो बेटियाँ है, बड़ी श्रीहासा - छोटी संयुक्ता और एक बेटा है श्रीनिवास | श्रीहासा की शादी विजयवाड़ा के एक संभ्रात परिवार में हुआ था | संयुक्ता की शादी दूर के एक मामाजी ने यह कहकर करवाया था कि लड़का का बहुत बड़ा कारोबार है,परन्तु शादी के बाद पता चला कि सिर्फ एक किराने की दुकान है|
दोनों बहनों की आर्थिक स्थिति में ज़मीन-आसमान का अंतर था | इसका एहसास संयुक्ता को मायके आकर ज्यादा होता था | समय के साथ-साथ संयुक्ता के पति ने भी कड़ी मेहनत और लगन से व्यापार को काफी बढ़ा लिया था |
इसबार वह दो सालों बाद मायके आई थी| सबने बहुत उत्साह और सम्मान के साथ उसकी आगवानी की|
उसने गहने उतार कर टेबल पर रख दिया | थाली लेकर नीचे चटाई पर बैठकर खाने लगी| खाते हुए उसने कहा आपसब तो इन गहनों का सम्मान कर रहे है , मैं तो अभी भी वही संयुक्ता हूँ |

प्रवासी







                                         प्रवासी
मैं मंदिर की सीढ़ी पर बैठा बस निहारे जा रहा था |वहाँ से जो भी नज़र आ रहा था | तालाब,खेत,खलिहान,बागीचा,पगडंडी सब बस नज़र में कैद कर लेना चाहता था | अचानक पीछे से आकर केशव ने मेरे कंधे पर हाथ रखा |“चल यार कल केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान चलते है,वहाँ हम अभी साईबेरिया से आये सारस देख सकते है” केशव ने कहा | लेकिन कल सुबह मुझे दिल्ली के लिये निकलना है,मैने उसे भरतपुर जाने से मना कर | प्रवासी शब्द अब मुझे अपना-सा लगने लगा है| 
तीन भाईयों में मैं सबसे छोटा हूँ | बड़े भाई साहब बैंक में कार्यरत है | मंझले भाई साहब गाँव के प्राथमिक विद्यालय में अध्यापक है | स्नातक होने के बाद मैं कानून की पढाई करना चाहता था | परन्तु दोनों भाई-भाभी अक्सर ताना देते “आसान नहीं है वक़ालत करना”|
एकदिन माँ ने एकांत में समझाया “वक़ालत के भरोसे मत बैठ,दिल्ली चला जा,तेरा दोस्त मोहन वही है ना वो तेरी मदद करेगा “ | घर की परिस्थिति देखकर मुझे भी माँ की बात सही लगी |
दिल्ली की जिंदगी एकदम अलग थी | एक छोटे से कमरे में पांच-छह लोग | सुबह उठते ही प्रतिदिन की जंग शुरू हो जाती | पहले पानी से, फिर ट्रैफिक से,फिर फक्ट्री में काम से और सहकर्मी और प्रबंधक से | जब थक-हार कर घर पहुँचता तो लगता चलो आज का दिन तो किसी तरह बीत गया | गाँव,घर,आँगन सब पीछे छूट गया | एक महानगर में अकेला पड़ गया | दिल्ली में मिलने वाले लोग पूछते है “कहाँ से हो ?” |
सालभर बाद गाँव आया हूँ | हाल-चाल और तनख्वाह पूछने के बाद एक ही सवाल रहता है उनका कि मैं वापस दिल्ली कब जा रहा हूँ |

Monday, November 21, 2011

कस्तूरी कुंडली बसे मृग ढूंढे वन माहि| ऐसे घट-घट राम है दुनिया देखे नाहि|| ..........................एकबार ईश्वर ने सब प्राणियों को बुलाया....परन्तु मनुष्य को जन बुझकर नही बुलाया.ईश्वर परमसत्य को मनुष्य के पहुँच से बाहर रखना चाहते थे.उन्होंने सभी प्राणियों से सुझाव माँगा कि परमसत्य को कहा छुपाया जाए.सबने अलग-अलग सुझाव दिए,लेकिन हर जगह मनुष्य की पहुँच स्थापित हो रही थी.बहुत देर बाद एक प्राणी ने कहा क्यों न परमसत्य को इन्सान के दिल में रखा जाए.उस प्राणी ने कहा कि इन्सान हर स्थान पर परमसत्य को तलासेगा,बस अपने अन्दर ही नही झाकेगा. यह बात एकदम सत्य है.....हम ईश्वर के खोज में भटकते रहते है....लेकिन अपने आत्म में जो बसा है उसे नही देख पाते.हमारी हालत कस्तूरी मृग की तरह है...जिस सुगंध की तलाश में वो भटकती रहती है.....वो उसके अन्दर ही बसी है.

Friday, November 18, 2011

आज जो देश की दुर्दशा है उसका बखान शब्दों में नहीं किया जा सकता है.देश की बागडोर एक ऐसे आदमी के हाथ सौपा गया जो खुद तो इमानदार है लेकिन अपने साथियों द्वारा देश की सम्पदा के लुट में उनके ऊपर नियंत्रण नहीं कर सका बल्कि अपने टीम में वकीलों की टोली बनाकर उनके बचाव में तरह-तरह के शब्द जाल बनाकर भरमाता है .किसी पर प्रधानमंत्री का नियंत्रण नहीं है.जिसको जो मन में आता है उसे बोलने के लिए उत्साहित किया जाता है.कोई कहता है कि इतने बड़े घोटाले में सरकारी सम्पति को कोई नुकशान नही हुआ.कभी राष्ट्रमंडल खेल घोटाला में उसके अध्यक्ष एवं दिल्ली सरकार को बरी किया जाता है.किसी को भी बेज्जत करना मामूली सी बात है.कभी अन्ना को' तुम', 'चोर','दगाबाज' कहा जाता है.कभी देश में आतंकबादी हमला होता है,सरकारी मशीनरी जाँच भी शुरू न कर पाए महाशयजी को बहुशंख्यक लोगो के हाथ नज़र आने लगते है.अब अन्ना के आन्दोलन में अमेरिका का हाथ नज़र आ रहा है.कभी रामदेव बाबा जैसा हश्र करने की बात कहते है.सरकार का मुखिया गांधीजी के तीन बंदरो की तरह आँख से नही देखना,कान से नही सुनना और मुंह से नही बोलने का रोले अदा करते है.
वश्तुस्थिति यही है कि नाव प्रधानमंत्रीजी के पास है उसपर लादे जीव-जंतु किसी दुसरे व्यक्ति के नामित है.जिनपर अनुशासन ,नियम कुछ भी लागु नही होता एवं पतवार मालिक के हाथ में है.प्रधानमंत्रीजी या तो आप पतवार मांग कर लीजिये या गद्दी छोर दीजिये.देश को बिना पतवार के नाविक कि तरह समुद्र में न डुबाये.मेरी यही प्रार्थना है.

प्यार को प्यार ही रहने दो कोइ नाम न दो.........

प्रेम ईश्वर की देन है,एक भाव है.जिस तरह ईश्वर हमारे शरीर के निर्माण करता है ठीक उसी प्रकार किसी के प्रति आत्मिक प्रेम भी ईश्वर की ही देन है,जिसे हम बदल नही सकते.हम चाहकर प्रेम नही कर सकते है.कभी मज़बूरी वश करना भी पड़े तो उसका बनावटीपन सबको दिखता है.प्रेम किसी भी जीव से हो सकता है,किसी रिश्ते की भी ये मुंहताज नही है.
जब एक स्त्री-पुरुष के बीच प्रेम पनपता है तो उसकी मंजिल होती है शादी.हमारे देश में स्त्री-पुरुष को प्रेम करने के लिए इस बंधन में बंधना जरुरी माना जाता है.ये सही है या गलत इसपर हम सबकी राय भिन्न-भिन्न होगी.भारतीय परंपरा के अनुसार विवाह एक सामाजिक बंधन है.जिसमे स्त्री-पुरुष का ही नहीं अपितु दोनों के परिवारों का भी मिलन होता है.समाज की सबसे बड़ी कुरीति जाति-प्रथा और कभी-कभी आर्थिक स्थिति में असामान्यता से भी प्रेम करने वालों को गुजरना पड़ता है.प्रेम तो निश्छल -निःस्वार्थ भावना है जिसका जाति या धन-दौलत से कोई लेना-देना नहीं है,क्योकि ये सब तय करने के बाद प्रेम हो ही नहीं सकता.यह तो आत्मा से उत्त्पन हुई भावना है.
समाज में नित-नए बदलाव हो रहे है,हर वर्ग के लोग शिक्षा के महत्तव समझने लगे है.हमारा दायरा बढ़ रहा है.लेकिन हम अपने-आप को बदलने में बहुत समय ले रहे है.हम पढ-लिख कर जब किसी मनचाहे मुकाम को पाने के बाद और ज्यादा रक्छात्मक रवैया अपनाते है.अपने -आप सपना बुनते है एवं उसे एक खुँटी मे टांग देते है.और सिर्फ उसी को सच् मानलेते है.समाज का विरोध सहने की शक्ति हम मे नही है.जबकी हम जानते है बदलाव का तो विरोध होता ही है.प्रेम किसी खुँटी कि मुंहताज नही है.ईश्वर की देन के साथ् खिलवार न करे........
सिर्फ एहसास है ये रूह से महसुस करो..... प्यार को प्यार ही रहने दो कोइ नाम न दो.........

Thursday, February 17, 2011

भारतीय रेल का सफ़र

सन 1853 में बॉम्बे गवर्नमेंट के मुख्य इंजिनियर जोर्जे क्लार्क को अपनी भांडुप यात्रा के दौरान बॉम्बे से ठाणे तक रेल चलाने का विचार आया.16 अप्रैल 1853 को उनका सपना पूरा हो गया जब 14 बोगियों में सवार 400 लोगों को लेकर ट्रेन अपह्रान 3 :30 को बोरीबंदर से रवाना हुई .15 अगस्त 1854 को पहली पैसिंजर ट्रेन हावड़ा से हुगली के बीच चली और इस तरह भारत में रेल परिवहन की शुरुआत हुई.
आज भारतीय रेल की 63465 कि.मी.लम्बी ट्रैक है और 7133 स्टेशन है.1951 में 6 ज़ोन थी इनके संचालन एवं देख-रेख के लिए और आज 16 रेलवे ज़ोन है.2 करोड़ लोग प्रतिदिन ट्रेन से सफ़र करते है.11000 ट्रेने हरदिन चलती है जिनमे 7000 पैसिंजर ट्रेन है.अमेरिका,रूस और चीन के बाद सबसे बड़ा रेल नेटवर्क भारत का ही है.
दार्जेल्लिंग हिमालयन रेलवे (जो नरोगेज कि बहुत पुराणी रेल व्यवस्था है) को युनेस्को द्वारा विश्व विरासत घोषित किया गया है.निलगिरी पर्वतीय रेल को भी विश्व विरासत घोषित किया गया है.लाइफलाइन एक्सप्रेस भारतीय रेल की चलंत अस्पताल सेवा है जो दुर्घटनाओ एवं अन्य परिस्थितियों में प्रयोग कि जाती है.

Saturday, February 12, 2011

कल शुक्रवार 11 -02 -2011 को बहुप्रतीक्षित सिनेमा 'पटियाला हाउस' रिलीज हुई.सिनेमा के निर्देशक निखिल आडवानी है.यह एक पंजाबी परिवार की कहानी है,जिसकी पिछली चार पीढ़िया लन्दन में रहती आयी है.परिवार का मुखिया चाहता है कि उनका बेटा पारिवारिक व्यवसाय चलाये,परन्तु बेटा क्रिकेटर बनना चाहता है.पिता के विरूद्ध जाकर पहली बार उसे असफलता मिलती है.माँ बेटे का भावना को समझती है एवम उसका साथ देती है.दूसरी बार प्रयास करने पर उसे अप्रत्याशित सफलता मिलती है.मुख्य कलाकार अक्षय कुमार,अनुष्का शर्मा,ऋषि कपूर,डिम्पल कपाडिया इत्यादी है.संगीत शंकर, एहसान,लॉय का है.गीत अवन्ती दत्त गुप्ता ने लिखा है.विशाल ददलानी,ऋचा शर्मा,हर्द कौर,महालक्ष्मी अययर,जसवीर,शफाकत अमानत अली ,सूरज जगन इत्यादि के स्वर है.ऋषि कपूर एवम डिम्पल कपाडिया ने उम्दा किया है.बाकी कलाकार का काम भी अच्छा है.अक्षय कुमार अपने से आधी उम्र की अभिनेत्री अनुष्का शर्मा के साथ भी जम रहे है. संगीत भी अच्छा है.साल 2010 अक्षय कुमार के लिए बहुत सफलता भरा नहीं था,देखते है इस फिल्म से उनका करियर ग्राफ ऊपर जाता है या नीचे आता है.
रुनु झा

Tuesday, February 8, 2011

श्रृंगी आश्रम

विस्फी प्रखंड मुख्यालय से 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है श्रृंगी ऋषि का आश्रम. यह मंदिर ग्राम के उत्तर-पूर्व दिशा में धौस नदी के तट पर स्थित है.यह मंदिर स्थानीय जनता की आस्था का पवित्र एवं प्रसिद्द केंद्र रहा है.
स्कन्द पुराण में श्रृंगी ऋषि की कथा वर्णित है.वाल्मीकि रामायण के अनुसार ऋषि श्रृंगी विभंडक ऋषि के पुत्र एवं महर्षि कश्यप के पौत्र
थे.राजा दशरथ के पुत्रेर्ष्टि यज्ञ में ऋषि श्रृंगी को बुलाने उनके द्वारा यज्ञाअनुष्ठान का वर्णन है.जिससे .राजा दशरथ को पुत्र -रत्न की प्राप्ति हुई थी.मिथिला ऋषि श्रृंगी के तपस्या का मुख्य केंद्र रहा है
जिन दम्पतियों की संतान सुख की कामना पूर्ण नही हो रही है वो यहाँ आकर "हरिवंश पुराण"विधिवत सुनते है तो उनकी कामना पूर्ण होती है.आज भी मिथिला में यह आस्था धूमिल नही हुई है.इस स्थान का ऐसा अद्भुत महत्व है कि सभी धर्मं संप्रदाय के लोगों की आस्था इसमें है.
1901 ई के सर्वे में इस स्थान का खतियान धर्मदेगा के नाम से उल्लेखित है जिसका अर्थ है कि यह एक धार्मिक स्थान है. दरभंगा-सीतामढ़ी रेलखंड पर टेकटार रेलवे स्टेशन से करीब 3 किलोमीटर की दूरी पर यह मंदिर स्थित है. टेकटार रेलवे स्टेशन और कमतौल स्टेशन के बीच
16 नंबर गुमटी के नजदीक 60 दशक में एक बोर्ड रेल विभाग ने लगा रखा है,जिस पर लिखा है "रामायण में वर्णित श्री श्रृंगी मुनि का आश्रम यहाँ से २किलोमेतेर उत्तर-पूर्व दिशा में अवस्थित है जहाँ केवल पैदल जाया जा सकता है".
यहाँ यह बताना भी जरुरी है कि जिस जगह में मंदिर स्थित है जमीन भूत पूर्व विधान पार्षद स्व .कुमार कल्याण लाल का था,इस मंदिर का न तो कोई मालिक है न ही कोई कमिटी है .भक्तजन ही यदा-कदा साफ- सफाई करते है ,लेकिन पूजा-पाठ प्रति दिन ग्रामीणों द्वारा कि जाती है. शिवरात्रि एवं शिव से सम्बंधित अन्य पर्व ग्रामीणों के सहयोग से धूम-धाम से मनाया जाता है.धार्मिक न्यास परिषद् का इस धार्मिक स्थल के संरक्षण का दायित्व बनता है.

सबसे पुराना बैंक

हमारे देश का सबसे बड़ा एवं पुराना बैंक है - भारतीय स्टेट बैंक.ब्रिटिश कल में ही 1806 ई. में बैंक ऑफ़ कलकात्ता की स्थापना की गयी थी.इसके बाद 1840 ई. और 1843 ई. में क्रमश:बैंक ऑफ़ बॉम्बे और बैंक ऑफ़ मद्रास की स्थापना की गयी.1870 ई. आते-आते इनके 50 ब्रांचों की स्थापना हो चुकी थी.इन बैंकों को अपने-अपने रिजन में मुद्रा बनाने का भी अधिकार प्राप्त था,परन्तु मूल्य निर्धारण ब्रिटिश सरकार करती थी.1921 ई.में इन तीनों बैंकों का विलय इम्पिरिअल बैंक में हो गया.इम्पिरिअल बैंक की शाखाए सिर्फ शहरों में ही थी.
15 अगस्त 1947 भारत को स्वतंत्रता मिली एवं 1951 ई. में पहली पंच्वार्शिये योजना बनी.तत्कालीन प्रधानमंत्री पं.नेहरु देश के हर छेत्र का विकास करना चाहते थे .भारत गाँवों में बसती है,इसलिए ग्रामीण भारत के विकास के बिना भारत का विकास संभव नही था.इन्ही बातों को ध्यान में रखकर 1955 ई. में इम्पिरिअल बैंक, भारतीय स्टेट बैंक बन गया.स्थापना के समय 470 शाखाये थी.आज भारतीय स्टेट बैंक की 18000 शाखाये है,और 22000 ए टी एम है.अन्य 30 देशों में भारतीय स्टेट बैंक की 50 शाखाये है.2,20,000 कर्मचारी इसमें कार्यरत है.यह आज देश के बदलाव का माध्यम बन गया है .बही खाते की जगह आज कंप्यूटर आ गया है.बीमा,बैंकिंग हर छेत्र में यह आगे आ रहा है.गाँव या करीब के गाँवों में बैंक की शाखाये होने की वजह से किसानों को सूदखोरों से मुक्ति मिल रही है.आज पर्यावरण संरकछन के लिए भी भारतीय स्टेट बैंक बहुत काम कर रही है.
रुनु झा
जमशेदपुर.

Thursday, January 20, 2011

वरुण गाँधी की शादी

स्व.संजय गाँधी और मेनका गाँधी के सुपुत्र एवं भारतीय जनता पार्टी के नेता वरुण गाँधी का विवाह मार्च 6 ,2011 को होने जा रहा है.वरुण गाँधी की होने वाली पत्नी का नाम यामिनी रॉय है.यामिनी पूर्व राजनयिक स्व. डॉ .सुनील रॉय एवं अरुणा वासुदेव की सुपुत्री है.स्व.सुनील रॉय मैक्सिको एवं अन्य देशों में भारत के राजनयिक थे. अरुणा वासुदेव NETPAC (Network for the promotion of Asian cinema) की संस्थापक एवं अध्याछा है.इस विषय में उन्होंने कई पुस्तके भी लिखी है.
यामिनी रॉय ने सत.स्टीफेंस कोलेज से तर्कशास्त्र में स्नातक किया है.उसके बाद उन्होंने पेरिस जाकर ग्राफिक एवं फाइन आर्ट का कोर्स किया.यामिनी का दिल्ली में ग्राफिक डीजाइन स्टूडियो है जिसका नाम इनकारनेशन है.
यामिनी शांतिनिकेतन छात्रा रही है . संयोग की बात है कि वरुण की दादी स्व.इंदिरा गाँधी ने भी कुछ समय के लिए शान्तिनिकेतन में अध्ययन किया था.

Friday, June 4, 2010

सीबीएसई का समाजवाद

CBSE १० वी बोर्ड की परीछाफल ग्रेड अनुसार प्रकाशित होने से बहुत बच्चों के मुख पर उदासी भी देखा चुकि मैं बहुत दिनों तक CBSE स्कूल में
पढाती थी .अतः बच्चों के मुख पर यह उदासी देख मेरे मन में भी कुछ शंका होने लगा, क्योंकि १०.३ ग्रेड अंक प्राप्त छात्रो से कुछ ९.६ या ९.८ अंक प्राप्त छात्र अधिक मेधावी थे. महारास्ट्र राज्य में प्रकाशित परिणाम अंक और ग्रेड दोनों दिया गया तो हमलोगों कि शंका सत्य ही था . उदाहरण के लिए कोई छात्र ३ विषय में ९९%अंक प्राप्त करता है अवं दो विषय में ९०% अंक प्राप्त करता है तो उसके प्राप्तांक का योग ४७७ हुआ एवं उसे ९.६ ग्रेड अंक मिला .वही दूसरी ओर एक छात्र को पांचो विषय में ९१% मिलता है जिसका योग ४५५ होता है तो उसे ग्रेड A1 मिलता है. अर्थातकुल प्राप्तांक में २२ अंक अधिक प्राप्त करने वाले छात्र का ग्रेड एवं अंक कम होगा. मुझे यह नहीं लगता कि एक के अंशु पे दुसरे खुसी किया जाए.वर्तमान वयवस्था हमे स्वतत्र भारत के उस समय का स्मरण करता है जब समाजवाद लेन के लिए अधिक आय वोलों पर अधिक एवं अवयभारिक कर का बोझ डाला जाता था.जिससे उसकी आय कम हो और कम आय वालों से अंतर कम रहे.यह देश के लिए कितना हानिकारक रहा ये सिब्बल जी जरुर जानते होंगे.
मेरा व्यग्तिगत अनुरोध है कि श्री कपिल सिब्बल से है कि अगर छात्रों में अताम्हात्य कम करने के उदेसय से यह किया गया इसे लागु रखा जाए पर समय-समय पर इसकी समिक्च्छा भी होनी चाहिए कि यह वयवस्था कितना कारगर रहा.परिणाम ग्रेड अनुसार ही निकले लेकिन १५ दिनों के बाद जब आत्महत्या कि प्रब्रिती साधारणतया शांत हो जाती है तब स्चूलों के माध्यम से छात्रों को प्राप्तांक भी उपलब्ध कराया जाए . जिससे मेधावी एवं अन्य छात्र अपनी उपलब्धि कि आकलन कर भविष्य के लिए योजना बनाये .

Wednesday, May 26, 2010

जिस देश में हजारों कि संख्या मे मुकदमा लंबित है ,वहाँ अभी वाल्मीकि क्या थे वो फैसला होना ज्यादा जरुरी हो गया है.कितने लोग तो सिर्फ फैसला सुनने के लिए जिन्दा रहते है,पर साँसे कम पर जाती है.मैं भी धार्मिक भावना कि कद्र करती हूँ .

Thursday, April 22, 2010

देश का गौरव :गोपीचंद पुल्लेला

जहाँ हम खिलाड़िओं को थोड़ा खेल और थोड़ा प्रचार के माध्यम से जानते है
वही गोपीचंद पुल्लेला ने नैतिकता के आधार पर कोला का विज्ञापन करने
से मना कर दिया था .